भारत में वजन घटाने वाली (Obesity Drugs) दवाओं का भविष्य

भारत में वजन घटाने वाली (Obesity Drugs) दवाओं का भविष्य
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भारत में मोटापा (ओबेसिटी) और मधुमेह (डायबिटीज) की समस्या तेजी से बढ़ रही है।भारत में वजन घटाने वाली (Obesity Drugs) दवाओं का भविष्य अनुमानों के अनुसार, अगर मौजूदा रुझान जारी रहे तो 30% से अधिक भारतीय मोटापे का शिकार हो सकते हैं। ऐसे में, वजन घटाने वाली दवाएं (ओबेसिटी ड्रग्स) न केवल एक स्वास्थ्य समाधान के रूप में उभर रही हैं, बल्कि एक बड़ा बाजार भी बन रही हैं। ये दवाएं, मुख्य रूप से GLP-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट क्लास की, जैसे सेमाग्लुटाइड (ओजेम्पिक, वेगोवी, राइबेल्सस) और टिरजेपाटाइड (माउंजारो), लोगों को 15-20% तक वजन कम करने में मदद कर रही हैं। लेकिन 2026 में इन दवाओं का पेटेंट समाप्त होने के साथ, सस्ते जेनेरिक वर्शन बाजार में आने वाले हैं, जो पहुंच को बढ़ाएंगे और बाजार को विस्फोटक रूप से विस्तार देंगे। यह लेख भारत में इन दवाओं के वर्तमान और भविष्य पर नजर डालता है, जहां सस्ती दवाएं और बढ़ता बाजार स्वास्थ्य क्रांति ला सकता है।

भारत में ओबेसिटी की चुनौती और दवाओं की भूमिका
भारत दुनिया में मधुमेह के सबसे अधिक रोगियों वाला देश है, और मोटापा इसकी जड़ है। शहरीकरण, गतिहीन जीवनशैली और बदलते आहार ने इस समस्या को बढ़ावा दिया है। मोटापा न केवल वजन बढ़ाता है, बल्कि हृदय रोग, डिमेंशिया और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम भी बढ़ाता है। ऐसे में, वजन घटाने वाली दवाएं एक क्रांतिकारी समाधान के रूप में सामने आई हैं। ये दवाएं भूख को नियंत्रित करती हैं, पाचन को धीमा करती हैं और मस्तिष्क के भूख केंद्र पर असर करती हैं।

2025 में इन दवाओं ने भारत में धूम मचा दी। एली लिली की माउंजारो मार्च में लॉन्च हुई और अक्टूबर तक मूल्य के आधार पर टॉप-सेलिंग दवा बन गई, जबकि नोवो नॉर्डिस्क की वेगोवी जून में आई। फार्मारैक के आंकड़ों के अनुसार, बाजार 2021 से 2024 तक पांच गुना बढ़कर 72 मिलियन डॉलर (करीब 600 करोड़ रुपये) तक पहुंच गया। नोवो नॉर्डिस्क की राइबेल्सस 2022 से बाजार का दो-तिहाई हिस्सा कब्जा कर चुकी है, जबकि माउंजारो ने लॉन्च के कुछ महीनों में 50 करोड़ रुपये की तिमाही बिक्री हासिल की। ये दवाएं न केवल वजन कम करती हैं, बल्कि व्यसनों (जैसे शराब, धूम्रपान) को कम करने और हृदय स्वास्थ्य सुधारने में भी मदद कर सकती हैं, हालांकि इन प्रभावों पर और शोध की जरूरत है।

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जेनेरिक्स का दौर और सस्ती दवाएं
2026 भारत में ओबेसिटी ड्रग्स के लिए टर्निंग पॉइंट साबित होगा। सेमाग्लुटाइड का पेटेंट जनवरी में कनाडा में और मार्च में भारत में समाप्त हो रहा है। इससे भारतीय कंपनियां जैसे सन फार्मा, डॉ. रेड्डीज, सिप्ला, बायोकॉन, नाटको फार्मा और अलकेम जेनेरिक वर्शन लॉन्च करने की तैयारी में हैं। नाटको फार्मा सबसे पहले बाजार में उतर सकती है, उसके बाद डॉ. रेड्डीज।

ये जेनेरिक्स मूल दवाओं से 60-90% सस्ते होंगे। वर्तमान में मासिक इलाज की लागत 10,000-15,000 रुपये है, जो जेनेरिक्स के साथ 3,000-6,000 रुपये तक गिर सकती है। इससे मध्यम वर्ग और छोटे शहरों तक पहुंच बढ़ेगी। उद्योग विशेषज्ञों का अनुमान है कि बाजार जल्दी 1 बिलियन डॉलर (करीब 8,300 करोड़ रुपये) तक पहुंच सकता है, और दशक के अंत तक 150 बिलियन डॉलर (करीब 12.5 लाख करोड़ रुपये) का हो सकता है। एली लिली और नोवो नॉर्डिस्क जैसी वैश्विक कंपनियां बाजार पर कब्जा जमाने के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ा रही हैं, लेकिन जेनेरिक्स से कीमतों में गिरावट तय है।

नई दवाएं भी पाइपलाइन में हैं। जैसे रेटाट्रुटाइड (ट्रिपल एगोनिस्ट), जो 2027 में आ सकती है और 25% तक वजन कम करने का दावा करती है। इसके अलावा, ओरल ऑप्शंस और मल्टी-पाथवे एक्टिवेटर्स बाजार को और विविध बनाएंगे।

Market Growth Charts for Obesity/GLP-1 Drugs in India
Visuals showing the explosive growth of the anti-obesity and GLP-1 market.

India GLP-1 Agonists Weight Loss Drugs Market Size & Outlook, 2030

बढ़ता बाजार: अवसर और चुनौतियां
ओबेसिटी ड्रग्स अब फार्मा इंडस्ट्री का मुख्य हिस्सा बन रही हैं। मैकिन्से रिपोर्ट के अनुसार, ये AI और EVs जैसी ट्रिलियन-डॉलर अवसर वाली कैटेगरी में शामिल हैं। भारत में ये दवाएं 2025 में ही 1,000 करोड़ रुपये की बिक्री पार कर चुकी हैं। जेनेरिक्स से बाजार का विस्तार मेट्रो से परे छोटे शहरों तक होगा, जहां मोटापा तेजी से फैल रहा है।

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भारत में वजन घटाने वाली (Obesity Drugs) दवाओं का भविष्य हैं हालांकि, चुनौतियां भी हैं। डॉक्टर चेतावनी दे रहे हैं कि बिना मेडिकल सुपरविजन के मिसयूज बढ़ सकता है। ये दवाएं कॉस्मेटिक नहीं, बल्कि मेटाबॉलिक थेरपी हैं। साइड इफेक्ट्स जैसे मतली, मसल लॉस और हार्मोनल असंतुलन हो सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि वजन घटाना दवा से शुरू होता है, लेकिन स्थायी स्वास्थ्य के लिए पोषण, व्यायाम और जीवनशैली बदलाव जरूरी हैं। अनियमित बाजार में नकली दवाओं का खतरा भी है।

मोटापे और वजन घटाने वाली दवाओं के बारे में अधिक जानकारी के लिए यह वीडियो देखें: Weight loss injections in India

निष्कर्ष: एक स्वस्थ भविष्य की ओर
भारत में ओबेसिटी ड्रग्स का भविष्य उज्ज्वल है। सस्ते जेनेरिक्स से करोड़ों लोगों तक पहुंच बढ़ेगी, जो मोटापे की महामारी से लड़ने में मदद करेगी। लेकिन सफलता के लिए जागरूकता, चिकित्सकीय मार्गदर्शन और जीवनशैली बदलाव जरूरी हैं। अगर सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए, तो ये दवाएं न केवल वजन कम करेंगी, बल्कि एक स्वस्थ समाज का निर्माण भी करेंगी। फिटनेस कोच और डॉक्टरों को इन दवाओं को दुश्मन नहीं, सहयोगी मानना चाहिए। 2026 में यह बाजार नई ऊंचाइयों को छूएगा, लेकिन सावधानी से।

  • FAQ: भारत में वेट लॉस ड्रग्स और उनका भविष्य
  • Q1. क्या भारत में वजन घटाने वाली दवाएं (जैसे Semaglutide) अब सस्ती मिलेंगी?
  • Ans: जी हाँ, मार्च 2026 में प्रमुख दवाओं के पेटेंट खत्म होने के बाद भारतीय फार्मा कंपनियां इनके ‘जेनेरिक वर्जन’ लॉन्च करेंगी। इससे दवाओं की कीमत में 70% से 80% तक की गिरावट आने की उम्मीद है।
  • Q2. क्या ये दवाएं केवल इंजेक्शन के रूप में ही उपलब्ध हैं?
  • Ans: नहीं, भारत में अब इंजेक्शन (Wegovy, Ozempic) के साथ-साथ Oral Tablets (Rybelsus) भी उपलब्ध हैं। आने वाले समय में भारतीय कंपनियां और भी बेहतर और सस्ती टैबलेट्स बाज़ार में लाएंगी।
  • Q3. इन दवाओं के मुख्य साइड इफेक्ट्स क्या हैं?
  • Ans: सबसे सामान्य साइड इफेक्ट्स में जी मिचलाना (Nausea), उल्टी, दस्त, कब्ज और पेट दर्द शामिल हैं। ये लक्षण आमतौर पर शरीर के दवा के साथ एडजस्ट होने पर कम हो जाते हैं, लेकिन इन्हें हमेशा डॉक्टर की निगरानी में ही लेना चाहिए।
  • Q4. क्या ये दवाएं बच्चों के लिए सुरक्षित हैं?
  • Ans: वर्तमान में, अधिकांश GLP-1 दवाएं केवल वयस्कों (Adults) के लिए मंजूर हैं। कुछ दवाओं को 12 साल से ऊपर के किशोरों के लिए अनुमति मिली है, लेकिन बिना विशेषज्ञ की सलाह के बच्चों को यह देना खतरनाक हो सकता है।
  • Q5. कैसे काम करती हैं ये आधुनिक दवाएं?
  • ​Ans: ये दवाएं GLP-1 (Glucagon-like peptide-1) receptor agonists तकनीक पर आधारित हैं। ये शरीर में प्राकृतिक हार्मोन की नकल करती हैं जो: मस्तिष्क को ‘पेट भरा होने’ का संकेत देती हैं।पाचन प्रक्रिया को धीमा करती हैं, जिससे भूख कम लगती है।इंसुलिन के स्तर को संतुलित कर ब्लड शुगर कंट्रोल करती हैं।
  • Q6. वजन घटाने वाली दवाएं किन लोगों को नहीं लेनी चाहिए?
  • Ans: जिन लोगों को थायराइड कैंसर का पारिवारिक इतिहास है, पैंक्रियाटाइटिस (Pancreatitis) की समस्या है या जो महिलाएं गर्भवती हैं, उन्हें इन दवाओं से बचना चाहिए।
  • Q7. क्या दवा बंद करने के बाद वजन फिर से बढ़ जाता है?
  • Ans: क्लिनिकल स्टडीज बताती हैं कि अगर दवा के साथ डाइट और एक्सरसाइज में बदलाव नहीं किया गया, तो दवा छोड़ने के बाद वजन दोबारा बढ़ने की संभावना रहती है।

By Dr. Avinash Joriya

Dr. Avinash Joriya is the Founder & CEO of Edupharmaexpert.in and an Associate Professor with over 7 years of expertise in pharmacy education and pharmacological research. A B.Pharm and M.Pharm alumnus of AKTU Lucknow, he has contributed to major government projects like Namami Gange (NMCG). With 5 published textbooks and an Indian Design Patent, Dr. Joriya is dedicated to mentoring students and bridging the gap in the pharma profession. We provide specialized guidance on Pharmacy careers (D.Pharm to PhD), alongside expert takes on Health, Education, Travel, Technology, Finance, and Books, helping the next generation of professionals build better habits and successful careers. And Never miss any New updates from Edupharmaexpert.in

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